शब्दार्थ

चीर

chīr

hiverb

अर्थ

चीरना, फाड़ना, भेदना या आर-पार निकल जाना।

विस्तार

काव्य में 'चीर' क्रिया का प्रयोग किसी वस्तु को भेदने, फाड़ने या उसके आर-पार निकल जाने के अर्थ में होता है। प्रस्तुत शेर में यह तीव्र दृष्टि के अस्तित्व के मर्म को भेदकर सत्य तक पहुँचने का प्रतीक है। यह शब्द अंतर्दृष्टि की तीक्ष्णता और गहराई को व्यक्त करता है।

व्युत्पत्ति

Sanskrit चीर (cīra - a strip, tearing) / Prakrit, developing into Hindustani verb चीरना (chīrnā).

प्रयोग

In classical Urdu poetry, 'chīr' is frequently employed to evoke the piercing effect of a glance (nigāh) or the rending of a collar (girēbān) in states of passion.

उदाहरण

जुल्मत को चीर कर इक नूर उभरा

तीर सीने को चीर कर निकल गया

समानार्थी

फाड़चाकभेद

संबंधित शब्द

चीरनाचीराचीर-फाड़
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