शब्दार्थ
चीख़ूँ
chīk͟hūñ
hiverb
अर्थ
चीख़ूँ, चिल्लाऊँ या फ़रियाद करूँ।
विस्तार
यह 'चीख़ना' क्रिया का उत्तम पुरुष एकवचन रूप है, जिसका अर्थ दर्द या विरह में ऊँची आवाज़ निकालना अथवा फ़रियाद करना है। इस शे'र में यह आशिक़ की उस बेबसी को दर्शाता है जहाँ वह अपनी पीड़ा को दबा नहीं सकता, भले ही उसकी सदा महबूब तक न पहुँचती हो। यह पुकार याद किए जाने के एहसास और आंतरिक तड़प का स्वाभाविक प्रकटीकरण है।
व्युत्पत्ति
Derived from the Hindustani onomatopoeic base 'चीख़' (shriek/scream), rooted in sound-symbolic Indo-Aryan verbal formations.
प्रयोग
In classical ghazal, it represents the breaking point of sabr (patience), where silent endurance yields to an uncontainable outcry of pain.
उदाहरण
दर्द से क्यूँ न चीख़ूँ जब दिल ही जल रहा हो
चीख़ूँ भी तो किस उम्मीद पे कि कोई सुनेगा
समानार्थी
चिल्लाऊँपुकारूँरोऊँ
संबंधित शब्द
चीख़आवाज़नालाफ़रियाद
