शब्दार्थ
गड़ो
gaṛo
hiverb
अर्थ
चुभो, धँसाओ या गड़ाओ (आज्ञार्थक: मत चुभो)।
विस्तार
शास्त्रीय उर्दू में 'गड़ो' आज्ञार्थक क्रिया है, जिसका अर्थ चुभोना, धँसाना या छेदना है। प्रस्तुत शे'र में इसका प्रयोग प्रेमिका की पलकों की सुई (सोज़न-ए-मिज़्गाँ) के लिए हुआ है कि वह दिल में अनाड़ीपन से न चुभे। शायर तंज़ करता है कि क्या तूने कभी किसी के ज़ख़्म को सिया भी है जो इस तरह सुई चुभो रहा है।
व्युत्पत्ति
From Prakrit *gaḍḍa- / Sanskrit gad- / gāḍha (to sink, enter deeply, plunge).
प्रयोग
In classical ghazal poetry, physical verbs like 'gaṛnā' are frequently employed metaphorically for glances, eyelashes (khadag/sozan), and arrows penetrating the lover's heart.
उदाहरण
न गड़ो नोक-ए-मिज़्गाँ को यूँ जिगर के पार
कहे कोई उसे कि तीर दिलों में न गड़ो
समानार्थी
चुभोधँसाओगड़ाओ
संबंधित शब्द
गड़नागड़ानाचुभनपैवस्त
