शब्दार्थ
गए-गुज़रे
gae-guzre
hiadjective
अर्थ
तुच्छ, पतित, निकम्मा या पूरी तरह बेक़द्र।
विस्तार
यह सामासिक पद ऐसे व्यक्ति को दर्शाता है जो अत्यंत पतित, तुच्छ या महत्वहीन समझा जाए। प्रस्तुत शेर में आशिक़ अपने स्वाभिमान को जताते हुए कहता है कि वह इतना भी गिरा-पड़ा या लाचार नहीं है कि माशूक़ की राह में बार-बार गिड़गिड़ाए। यह आत्मसम्मान और विरह की लाचारी के बीच की कशमकश को व्यक्त करता है।
व्युत्पत्ति
A compound of Hindustani 'गया' (past participle of जाना, Sanskrit गत) and Persian-derived 'गुज़रा' (from guẕashtan, to pass).
प्रयोग
In classical Urdu poetry, it is frequently used rhetorically to contest the beloved's disdain and defend the lover's injured self-worth.
उदाहरण
हम ऐसे भी गए-गुज़रे नहीं कि कोई क़द्र न रहे।
ज़माने की नज़रों में वो गए-गुज़रे समझे जाते हैं।
समानार्थी
तुच्छनिकम्मापतितज़लील
संबंधित शब्द
गुज़रनागिरा-पड़ाबेक़द्रबदहाल
