शब्दार्थ
गोशे
goshe
hinoun (masculine plural/oblique
अर्थ
कोने, एकांत स्थान या तन्हाई के ठिकाने।
विस्तार
शास्त्रीय उर्दू शायरी में 'गोशे' का अर्थ भौतिक कोनों के साथ-साथ एकांत या तन्हाई के ठिकानों से है। यह अक्सर दुनिया के शोरगुल से दूर सुकून, आत्मचिंतन या विरह की पीड़ा सहने के स्थान का प्रतीक बनता है। दिल की गहराइयों या तन्हाई के पलों को व्यक्त करने के लिए इसका बहुतायत से प्रयोग होता है।
व्युत्पत्ति
Persian (گوشه - gōsha)
प्रयोग
In ghazals, it is favored in expressions of meditative reclusion and romantic despair to evoke sanctuary from the world.
उदाहरण
गोशे तन्हाई के सब अश्कों से तर हैं
दिल के गोशों में बसी है याद तेरी
समानार्थी
कोनेखलवत-गाहेंज़विए
संबंधित शब्द
गोशा-ए-तन्हाईगोशानशीनगोशा-गीर
