शब्दार्थ

ग़रीब-उद-दयार

gharīb-ud-diyār

hiadjective / noun

अर्थ

परदेसी, अपने वतन से दूर या बेगाना इंसान।

विस्तार

शास्त्रीय शायरी में 'ग़रीब-उद-दयार' उस व्यक्ति को कहते हैं जो अपने वतन से दूर, परदेस में बेगाना और तन्हा रहता हो। इस शेर में आशिक़ अपनी ख़ामियों और बेगानेपन को स्वीकारते हुए महबूब के उस वीराने को आबाद करने का दावा करता है जिसे फ़रिश्ते भी आबाद न कर सके।

व्युत्पत्ति

Arabic compound: 'gharīb' (stranger, foreign) + 'al-' (the) + 'diyār' (plural of dār: dwellings, abodes, countries).

प्रयोग

Commonly employed in classical ghazals to evoke the poignant melancholy of a solitary lover wandering far from home or the beloved's street.

उदाहरण

दश्त-ए-ग़ुरबत में कोई ग़रीब-उद-दयार

ग़रीब-उद-दयार की बेबसी और तन्हाई

समानार्थी

परदेसीबेगानाआवारह-वतनख़ाना-बदोश

संबंधित शब्द

ग़ुरबतदयारमुसाफ़िरअजनबी
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