शब्दार्थ

ग़ैर-अज़-इस्तिकाक

ghair-az-istikaak

hiprepositional phrase

अर्थ

रगड़ या घर्षण के सिवा कुछ नहीं।

विस्तार

यह फ़ारसी-अरबी सामासिक पद है जिसका अर्थ है 'घर्षण या रगड़ के अलावा कुछ नहीं'। इस शे'र में इसका आशय यह है कि क़लम की सरसराहट (सरीर-ए-ख़ामा) वास्तव में दिल या समझ के कपाट खुलने की चरमराहट के सिवा कुछ नहीं है। यह रचना-प्रक्रिया को आंतरिक द्वार के खुलने की भौतिक ध्वनि के रूप में प्रस्तुत करता है।

व्युत्पत्ति

Compound of Persian 'ghair-az' (except, other than) and Arabic 'iṣṭikāk' (verbal noun from the root ṣ-k-k, meaning collision, clashing, or rubbing).

प्रयोग

In classical Urdu poetry, this compound is employed to reduce an apparent artistic phenomenon to a visceral, mechanical metaphor.

उदाहरण

यह आवाज़ ग़ैर-अज़-इस्तिकाक-ए-संग कुछ भी न थी।

उसकी तहरीर ग़ैर-अज़-इस्तिकाक-ए-दर नहीं मालूम होती।

समानार्थी

सिवाए-रगड़ब-जुज़-इस्तिकाकसिवाए-घर्षण

संबंधित शब्द

इस्तिकाकग़ैर-अज़सरीर-ए-ख़ामाफ़तह-उल-बाब
← शब्दकोश पर वापस