शब्दार्थ
ख़सम-जान
khasam-jaan
hinoun
अर्थ
जान का दुश्मन, प्राणघातक शत्रु या जानलेवा।
विस्तार
शाब्दिक रूप से इसका अर्थ प्राणघातक शत्रु या जीवन का विरोधी है। शास्त्रीय उर्दू शायरी में यह रूपक प्रायः उस निष्ठुर प्रेमिका के लिए प्रयुक्त होता है जिसकी बेरुखी और नाज़-ओ-अंदाज़ आशिक़ के लिए जानलेवा होते हैं। प्रस्तुत शे’र में यह आशिक़ की जान लेने वाली उस प्रेमिका का वर्णन करता है जो अपने नाज़ में लीन है।
व्युत्पत्ति
Arabic 'khasm' (خصم, adversary/enemy) + Persian 'jān' (جان, soul/life).
प्रयोग
Often used in ghazals as an accusatory yet tender trope for the cruel, aloof beloved.
उदाहरण
वो सितमगर ख़सम-ए-जान बन गया
निगाह-ए-नाज़ ख़सम-ए-जान ठहरी
समानार्थी
दुश्मन-ए-जानक़ातिलजानी-दुश्मन
संबंधित शब्द
ख़समजानआशिक़महव-ए-नाज़
