शब्दार्थ

ख़सान

khasaan

hinoun

अर्थ

तिनके, तुच्छ वस्तुएँ या नीच और अधम लोग।

विस्तार

फ़ारसी और उर्दू शायरी में 'ख़सान', 'ख़स' (तिनका या घास-फूस) का बहुवचन है, जिसका लाक्षणिक अर्थ नीच, तुच्छ या अविश्वसनीय लोग होता है। इस शेर में यह सांसारिक मतलबी और तुच्छ लोगों की चंचलता को दर्शाता है, जिनसे वफ़ा की उम्मीद करना व्यर्थ बताया गया है। जैसे हवा में उड़ते तिनके कहीं टिक नहीं सकते, वैसे ही ये लोग भी वफ़ादारी पर क़ायम नहीं रह सकते।

व्युत्पत्ति

Persian: plural of 'khas' (خس - straw, reed, rubbish; metaphorically a vile or contemptible person).

प्रयोग

In classical Urdu ghazals, it is employed as a metaphor for insincere, base, or fickle people from whom fidelity is an impossible expectation.

उदाहरण

ख़सान-ए-दहर से उम्मीद-ए-वफ़ा फ़िज़ूल है।

हवा के रुख़ पे बहकते हैं ये ख़सान सारे।

समानार्थी

तिनकेफ़रोमायाकमज़र्फ़अधम

संबंधित शब्द

ख़सख़स-ओ-ख़ाशाकख़सीस
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