शब्दार्थ
ख़स्ता-जानी
khasta-jaani
hinoun
अर्थ
आत्मा की व्याकुलता, दुर्दशा या आंतरिक लाचारी।
विस्तार
यह शब्द मन और आत्मा की घायल, टूटी हुई और अत्यंत पीड़ित अवस्था को दर्शाता है। मीर के इस शेर में इसका प्रयोग जीवनभर झेली गई लगातार पीड़ा और मानसिक थकावट की व्याख्या के लिए हुआ है। यह ऐसी स्थिति है जहाँ जीवित रहना हर क्षण मरने के समान हो जाता है।
व्युत्पत्ति
Persian: compound of 'khasta' (خستہ, meaning wounded, broken, weary) + 'jaan' (جان, meaning life, soul) + abstract suffix '-i' (ی).
प्रयोग
A frequent motif in classical Urdu ghazal, particularly in Mir's poetry, expressing the prolonged existential grief and fatal weariness of the lover.
उदाहरण
क्या करूँ शरह ख़स्ता-जानी की
मेरी ख़स्ता-जानी का सबब कोई न पूछे
समानार्थी
रंजूर-दिलीशिकस्तगीबे-हालीदरमांदगी
संबंधित शब्द
ख़स्ता-हालख़स्ता-दिलजाँ-गुदाज़शिकस्ता-दिल
