शब्दार्थ

खुलतीं

khultīṅ

hiverb

अर्थ

खुलतीं; काश आँखें न खुली होतीं।

विस्तार

यह 'खुलना' क्रिया का बहुवचन स्त्रीलिंग हेतुहेतुमद्भूत या तमन्नाई रूप है, जो 'आँखें' के अनुसार आया है। इस शे'र में यह 'काश' के साथ मिलकर गहरा अफ़सोस ज़ाहिर करता है कि काश अदम की पुरसुकून नींद से हस्ती की दुनिया में आँखें कभी न खुलतीं।

व्युत्पत्ति

Derived from Old Indo-Aryan / Sanskrit root 'खुल्ल' (khulla) or Prakrit roots related to opening or loosening, evolving into Hindi/Urdu 'खुलना / کھلنا'.

प्रयोग

In classical Urdu poetry, the opening of eyes often marks a harsh awakening from blissful oblivion into the torment of consciousness.

उदाहरण

काश न खुलतीं ये चश्म-ए-तमन्ना

खुलतीं अगर राहें तो हम भी चलते

समानार्थी

वा होतींउघड़तीं

संबंधित शब्द

खुलनाआँखेंख़्वाबअदम
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