शब्दार्थ
खोलूँ
kholūñ
hiverb
अर्थ
यदि मैं खोलूँ, उघाड़ूँ या अनावृत करूँ।
विस्तार
यह 'खोलना' क्रिया का उत्तम पुरुष एकवचन संभाव्य/शर्तिया रूप है। इस शेर में इसका आशय अपने घायल सीने को महबूब के सामने अनावृत करने या उघाड़ने से है। यहाँ ज़ख़्मों को खोलकर उन पर नमक छिड़कवाने की पीड़ा को भी एक आनंद के रूप में देखा गया है।
व्युत्पत्ति
From Middle Indo-Aryan, tracing back to Sanskrit उद्घाटयति (udghāṭayati, uncovers/opens).
प्रयोग
In ghazal verse, opening or uncovering typically evokes unveiling hidden sorrow, untying knots of the heart, or exposing mortal wounds to the cruel beloved.
उदाहरण
ग़म-ए-दिल अगर मैं खोलूँ तो फ़साना बन जाए
जो गिरह खोलूँ कफ़स की तो रिहाई मिल जाए
समानार्थी
उघाड़ूँवा करूँज़ाहिर करूँ
संबंधित शब्द
खोलनाखुलाउघाड़नासीना-ए-मजरूह
