शब्दार्थ
ख़रामी-हा
khirāmī-hā
hinoun
अर्थ
नाज़ुक या नख़रेदार चालें; महबूब की मदभरी चालें।
विस्तार
फ़ारसी और शास्त्रीय उर्दू शायरी में 'ख़रामी-हा' शब्द 'ख़िरामी' (नाज़-ओ-अंदाज़ से चलने) का बहुवचन रूप है, जिसमें फ़ारसी प्रत्यय '-हा' लगा है। इस शेर में यह महबूब की बेपरवाह और मदमस्त चालों को दर्शाता है, जो आशिक़ के दिल में इश्क़ की आग भड़काती हैं। यह महबूब की दिलकश रफ़्तार के विविध और अनगिनत रूपों की ओर संकेत करता है।
व्युत्पत्ति
Persian: from 'khirām' (graceful gait, strut) + abstract suffix '-ī' + plural suffix '-hā'.
प्रयोग
The Persian plural suffix '-hā' is often suffixed to abstract nouns in high classical ghazal to emphasize intensity, poetic multiplicity, or aesthetic excess.
उदाहरण
बे-परवा ख़रामी-हा का जादू
नाज़-ए-ख़रामी-हा पर क़ुरबान
समानार्थी
चालेंरफ़्तारेंनाज़-ओ-अंदाज़
संबंधित शब्द
ख़िरामख़ुश-ख़िरामरफ़्तारख़िरामिश
