शब्दार्थ
ख़र्ज
kharj
hinoun
अर्थ
व्यय, ख़र्च, लागत या ख़रचा।
विस्तार
'ख़र्ज' का अर्थ व्यय, ख़र्चा अथवा लागत होता है। इस शेर में यह 'ख़र्ज-ए-ला-हासिल' (व्यर्थ का व्यय) के रूप में आया है, जो इश्क़ और शराबनोशी के ऐसे खर्चीले शौक को दर्शाता है जिसका कोई परिणाम नहीं निकलता। शायर स्पष्ट करता है कि दरवेशी में इस निष्फल व्यय को वहन करने के लिए प्रचुर दौलत की आवश्यकता होती है।
व्युत्पत्ति
Arabic root خ-ر-ج (kh-r-j), denoting exit, outgo, issue, or expenditure; naturalized in Urdu/Persian poetry alongside its common variant 'kharch'.
प्रयोग
In classical ghazals, it is used both in literal monetary contexts and metaphorically to depict the toll or emotional cost exacted upon the lover's life.
उदाहरण
रोज़-ओ-शब का ख़र्ज उठाना
ख़र्ज-ए-ला-हासिल में उम्र गंवाना
समानार्थी
ख़र्चव्ययमसारिफ़लागत
संबंधित शब्द
ख़र्चाइख़राजातला-हासिलख़र्च-ए-बज़ा
