शब्दार्थ

ख़र्ची

kharchī

hinoun, feminine

अर्थ

जेब-ख़र्च, दैनिक ख़र्च या निर्वाह के लिए दी जाने वाली रक़म।

विस्तार

पारंपरिक प्रयोग में 'ख़र्ची' से तात्पर्य दैनिक जेब-ख़र्च या सफ़र व गुज़ारे के लिए दी जाने वाली रक़म से है। इस शेर में यह उन रईसों की पुरानी समृद्धि को दर्शाता है जिनका रोज़ का ख़र्च रुपयों में था, जो अब मुफ़लिसी के दौर में चंद आनों के मोहताज हो गए हैं।

व्युत्पत्ति

Derived from Arabic 'kharj' (spending, cost) adopted into Persian and Urdu with the relative suffix '-ī'.

प्रयोग

In poetry, it frequently symbolizes the financial reality of everyday life or contrasts former aristocratic opulence with present financial ruin.

उदाहरण

सफ़र की ख़र्ची न बची

रोज़-मर्रा की ख़र्ची का हिसाब

समानार्थी

जेब-ख़र्चज़ात-ख़र्चगुज़ारा

संबंधित शब्द

ख़र्चख़र्चाइख़राजात
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