शब्दार्थ

ख़ारी

khwārī

hinoun

अर्थ

अपमान, ज़िल्लत, दुर्दशा या ख़स्ताहाली।

विस्तार

शास्त्रीय उर्दू काव्य में 'ख़ारी' (ख़्वारी) से आशय उस ज़िल्लत, अपमान और दुर्दशा से है जिसे आशिक़ प्रेम की राह में सहता है। प्रस्तुत शेर में यह प्रेमी के उस अनिवार्य कष्ट और बदहाली को दर्शाता है जिसके बिना उसका जीवन और कल निरर्थक है। यह शब्द प्रेम में विवशता और आत्म-समर्पण की चरम स्थिति को व्यक्त करता है।

व्युत्पत्ति

Persian 'khwār' (abject, wretched, humiliated) + abstract noun suffix '-ī'.

प्रयोग

In the ghazal, it is frequently coupled with grief, tears, and wanderlust as an honorable mark of unconditional love rather than mere shame.

उदाहरण

कूचा-ए-यार में ख़ारी उठाना

इश्क़ की ख़ारी को मुक़द्दर समझना

समानार्थी

ज़िल्लतरुसवाईबदहालीबे-इज़्ज़ती

संबंधित शब्द

ख़्वारख़स्तगीज़ारीबे-कसी
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