शब्दार्थ

ख़ूँ-चकाँ

Khoon-chakaan

hiadjective

अर्थ

खून टपकाता हुआ, लहू से तर-ब-तर।

विस्तार

शास्त्रीय शायरी में 'ख़ूँ-चकाँ' का आशय उस चीज़ से है जिससे लगातार लहू रिस रहा हो या टपक रहा हो। इस शेर में यह इश्क़ की राह के लिए आया है, जिसे मजनू या दीवानों की लहू बहती रग के समान बताया गया है। यह शब्द प्रेम के मार्ग में मिलने वाली चरम पीड़ा और क़ुर्बानी का प्रतीक है।

व्युत्पत्ति

Persian compound formed from 'khūn' (blood) and 'chakān' (dripping/trickling, active participle of 'chakīdan', to drip).

प्रयोग

Frequently applied in ghazals to the lover's weeping eyes (dīdah), broken heart (dil), or the thorny path of love to depict extreme anguish.

उदाहरण

दीदा-ए-ख़ूँ-चकाँ का मंज़र

ज़ख़्म-ए-ख़ूँ-चकाँ का दर्द

समानार्थी

ख़ूँ-बारलहू-लुहानख़ून-आलूद

संबंधित शब्द

ख़ूँ-रेज़ख़ून-आलूदाअश्क-ए-ख़ूँ
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