शब्दार्थ

कसर

kasr

hinoun (feminine)

अर्थ

कमी, त्रुटि, अभाव या अधूरापन।

विस्तार

उर्दू शायरी में 'कसर' का अर्थ किसी चीज़ में रह जाने वाली कमी, कोताही या अधूरापन होता है। इस शेर में 'क्या कसर रहे है' का आशय है कि रोने में कोई कमी या रुकावट बाकी नहीं रहती। विलाप इतनी शिद्दत से होता है कि रूमाल लगातार दो दिन तक बादलों की मानिंद तरबतर रहता है।

व्युत्पत्ति

Arabic root k-s-r (كَسْر), literally meaning 'breaking' or 'fraction', which extended in Persian and Hindustani to mean shortfall, defect, or shortage.

प्रयोग

Frequently used in classical ghazals within idioms like 'kasr chhorna' or 'kasr rahna' to express boundless passion, sorrow, or unsparing cruelty of the beloved.

उदाहरण

रोने में भी कोई कसर बाक़ी न रही।

कसर न छोड़ी कोई जफ़ा में।

समानार्थी

कमीनुक़्सकोताही

संबंधित शब्द

शिकस्तमुंकसिरखाकसार
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