शब्दार्थ
कने
kane
hipostposition
अर्थ
पास, निकट, समीप, के यहाँ।
विस्तार
शास्त्रीय उर्दू और पुरानी रेख़्ता में 'कने' एक संबंधबोधक (परसर्ग) है जिसका अर्थ 'के पास' या 'समीप' होता है। प्रस्तुत शे'र में इसका प्रयोग किसी के पास जाकर याचना करने के संदर्भ में हुआ है ('किस कने जा हाथ पसारें' अर्थात 'किसके पास जाकर हाथ फैलाएँ')। यह शब्द आरंभिक दौर की शायरी में बहुतायत से प्रयुक्त होता था।
व्युत्पत्ति
Prakrit / Old Indo-Aryan, related to Sanskrit 'karṇa' (ear/side/edge) evolving into regional vernaculars as 'kan' or 'kane' meaning 'near' or 'beside'.
प्रयोग
A characteristic marker of archaic Rekhta and classical ghazal (such as in Mir and Sauda), largely superseded by 'ke paas' in modern Urdu.
उदाहरण
दिल-ए-बर्बाद के कने कोई नहीं आता।
किस कने जावें हम अपनी फ़रियाद ले कर।
समानार्थी
पासनज़दीकसमीपतीर
संबंधित शब्द
कनपासनिकट
