शब्दार्थ

कजी

kajī

hinoun

अर्थ

टेढ़ापन, तिरछापन, कपट या हठ।

विस्तार

'कजी' का शाब्दिक अर्थ टेढ़ापन या झुकाव है, परंतु काव्य में इसका भावार्थ कपट, दुर्भावना या हठधर्मी स्वभाव से है। इस शेर में यह छल-कपट या दुर्भावनापूर्ण आचरण के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है, जिसे वक्ता अपना तौर-तरीका नहीं मानता। शास्त्रीय शायरी में यह अक्सर महबूब की तिरछी अदा या ज़माने के टेढ़ेपन के संदर्भ में भी आता है।

व्युत्पत्ति

Persian (کجی kajī), derived from 'kaj' (crooked/bent) + abstract noun suffix '-ī'.

प्रयोग

Frequently deployed in classical ghazals to contrast the lover's honesty with the crookedness of fate or the coquettish deviousness of the beloved.

उदाहरण

कजी-ए-अबरू-ए-यार

शेवा-ए-कजी से बाज़ आना

समानार्थी

टेढ़ापनतिरछापनकपटहठ

संबंधित शब्द

कजकज-अदाकज-कुलाहकज-फ़हम
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