शब्दार्थ

काहे

kaahe

hiinterrogative adverb

अर्थ

किसलिए, क्यों, किस कारण से।

विस्तार

शास्त्रीय शायरी में 'काहे' प्रश्नवाचक अव्यय या सर्वनाम है जिसका अर्थ 'क्यों' अथवा 'किसलिए' होता है, जो प्रायः 'काहे को' के रूप में आता है। मीर के इस शे’र में यह सवालिया अंदाज़ में प्रयुक्त हुआ है कि इतने शोर-ओ-ग़ुल में पड़ोसी भला कैसे सो पाएगा। यह शब्द प्रारंभिक रेख़्ता में ब्रजभाषा और अवधी के सहज भाषाई प्रभाव को दर्शाता है।

व्युत्पत्ति

From Sanskrit 'कस्य' (kasya) through Prakrit into Old Hindi and Braj Bhasha, widely retained in early Hindustani/Rekhta.

प्रयोग

Widely used in early Rekhta poetry (notably by Mir and Sauda) before late classical standard Urdu favored 'क्यों'.

उदाहरण

काहे को अब याद किसी की आए

काहे को दिल इतना बे-क़रार है

समानार्थी

क्योंकिसलिएकिस वास्ते

संबंधित शब्द

काहे कोकौनेकिधर
← शब्दकोश पर वापस