शब्दार्थ

क़ुलक़ुल

qulqul

hinoun

अर्थ

सुराही से शराब उंडेलने की आवाज़, गड़गड़ाहट।

विस्तार

'क़ुलक़ुल' उस आवाज़ को कहते हैं जो सुराही की संकरी गर्दन से मदिरा उँडेलते समय गड़गड़ाहट के रूप में निकलती है। शास्त्रीय उर्दू शायरी में यह मयकदे की रौनक और सुरूर का एक चिरपरिचित प्रतीक है। इस शेर में यह सुराही की आवाज़ और रंददाना बेबाकी के संदर्भ में प्रयुक्त हुई है।

व्युत्पत्ति

Arabic onomatopoeia (قَلْقَلَ - to shake, rumble, or gurgle).

प्रयोग

Frequently found in the Persianized compound 'क़ुलक़ुल-ए-मीना' to evoke the sensory and musical pleasure of wine-drinking in classical ghazals.

उदाहरण

क़ुलक़ुल-ए-मीना से मयख़ाने में रौनक़ आ गई।

सुराही की क़ुलक़ुल पर रिंद झूम उठे।

समानार्थी

ग़ुलग़ुलाआवाज़छलकन

संबंधित शब्द

मीनासुराहीमयख़ानासाक़ी
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