शब्दार्थ
क़लंदर
qalandar
hinoun
अर्थ
सांसारिक बंधनों से मुक्त मस्त-मौला सूफ़ी या फ़क़ीर।
विस्तार
क़लंदर उस मस्त-अलस्त सूफ़ी दरवेश को कहते हैं जो दुनियावी बंधनों, रीति-रिवाजों और दौलत की परवाह नहीं करता। प्रस्तुत शे'र में 'मीर' ने ख़ुद को क़लंदर बताकर यह स्पष्ट किया है कि वे अभावों के बीच भी आंतरिक रूप से सदा प्रसन्न और बेपरवाह रहे।
व्युत्पत्ति
Arabic/Persian origin, derived from the tradition of the Qalandariyya order of antinomian Sufi mendicants.
प्रयोग
In classical Urdu poetry, the figure of the qalandar epitomizes sovereign spiritual detachment, nonconformism, and joyful indifference to worldly sorrow.
उदाहरण
शाही से क्या ग़रज़, हम तो क़लंदर मिज़ाज हैं।
क़लंदर की तरह दुनिया के हर ग़म से बेपरवाह रहा।
समानार्थी
मलंगदरवेशफ़क़ीरआज़ाद-मनिश
संबंधित शब्द
दरवेशफ़क़ीरसूफ़ीमलंग
