शब्दार्थ

क़र्ज़

Qarz

hinoun, masculine

अर्थ

ऋण, उधार या बाक़ी देनदारी।

विस्तार

शाब्दिक रूप से इसका अर्थ उधार या ऋण होता है। इस शेर में यह लाक्षणिक रूप से एक अधूरी ज़िम्मेदारी या फ़र्ज़ को दर्शाता है, जिसे प्रेमी के नाख़ूनों को उस आधी खुली गाँठ को पूरी तरह सुलझाकर चुकाना है। यह प्रेम में निरंतर प्रयास और बेचैनी के दायित्व का प्रतीक है।

व्युत्पत्ति

Arabic root q-r-ḍ (ق-ر-ض), originally meaning to cut off, hence a portion of property given out as a loan.

प्रयोग

In ghazal poetry, it frequently appears in contexts of destitution, tavern drinking on credit, or existential dues owed to fate.

उदाहरण

क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हाँ

ज़िंदगी का क़र्ज़ हर साँस के साथ अदा हुआ

समानार्थी

उधारऋणदेनदारी

संबंधित शब्द

तक़ाज़ाअदावाजिबदेनदार
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