शब्दार्थ

किब्र

kibr

hinoun

अर्थ

घमंड, अहंकार, तकब्बुर या गर्व।

विस्तार

शास्त्रीय काव्य और नैतिकता में 'किब्र' का अर्थ अहंकार, घमंड या तकब्बुर होता है, जिसे एक आत्मिक दोष माना जाता है। प्रस्तुत शेर में यह 'नाज़' के साथ प्रयुक्त हुआ है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि ख़ुदी के ओज में झूठा अभिमान नहीं होता। यह शब्द वास्तविक गरिमा और ओछे घमंड के बीच का अंतर दर्शाता है।

व्युत्पत्ति

Arabic root k-b-r (ك-ب-ر), relating to greatness or being large; evolving into the moral concept of false grandeur or arrogance.

प्रयोग

In mystical and philosophical ghazals, 'kibr' is regularly juxtaposed against 'ijz' (humility) or 'niyaz' (submission).

उदाहरण

किब्र-ओ-ग़ुरूर से दिल को पाक रखना।

उसके मिज़ाज में किब्र की कोई गुंजाइश न थी।

समानार्थी

तकब्बुरघमंडअहंकारग़ुरूर

संबंधित शब्द

मुतकब्बिरकिब्रियाईनाज़ख़ुद-पसंदी
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