शब्दार्थ
क़फ़स-ज़ाद
qafas-zād
hiadjective
अर्थ
पिंजरे में पैदा हुआ; जन्मजात क़ैदी।
विस्तार
शास्त्रीय उर्दू शायरी में 'क़फ़स-ज़ाद' का अर्थ है वह पंछी जो पिंजरे में ही जन्मा हो और जिसने कभी आज़ादी की हवा न देखी हो। इस शे'र में यह जन्मजात बंदी के रूप में प्रयुक्त हुआ है जो बाग़ से केवल पंख फड़फड़ाने की दूरी पर होकर भी क़ैदी ही रहता है। यह भाग्यवश या जन्म से ही बेबसी और ग़ुलामी झेलने वाले का प्रतीक है।
व्युत्पत्ति
Compound of Arabic 'qafas' (cage) and Persian suffix '-zād' (born of, from 'zādan' to be born).
प्रयोग
Frequently used in the ghazal tradition as a poignant metaphor for the lover or soul born into inescapable existential bondage.
उदाहरण
क़फ़स-ज़ाद पंछी को परवाज़ की ख़बर क्या
क़फ़स-ज़ाद दिल कभी गुलशन का ख़्वाब न देखे
समानार्थी
ख़ाना-ज़ादपैदाइशी क़ैदीअसीर-ए-अज़ल
संबंधित शब्द
क़फ़ससय्यादआशियानापरवाज़
