शब्दार्थ
काफ़िर-अदा
kāfir-adā
अर्थ
काफ़िर जैसी दिलकश और ज़ालिम अदाओं वाला महबूब।
विस्तार
उर्दू शायरी में 'काफ़िर-अदा' ऐसे माशूक़ को कहते हैं जिसके नाज़-ओ-अंदाज़ इतने कातिलाना और दिलकश होते हैं कि वे ज़ाहिदों का ईमान भी लूट लेते हैं। इस शे’र में यह उस माशूक़ के लिए आया है जिसके ख़ूनी इशारे ने ईश-भक्तों की अक़्ल और दीन-धर्म दोनों छीन लिए। यह शब्द कुफ़्र की बेनियाज़ी और हुस्न की दिलरुबाई का प्रतीक है।
व्युत्पत्ति
Compound formed from Arabic 'kāfir' (infidel, disbeliever; poetically, cruel beauty) and Arabic-Persian 'adā' (grace, charm, gesture).
प्रयोग
A stock motif in classical ghazals used to glorify the beloved's alluring cruelty, contrasting it directly against religious dogmatism and ascetic piety.
उदाहरण
उस काफ़िर-अदा की एक नज़र ने ज़ाहिद का ईमान छीन लिया।
हर दिल फ़िदा हुआ उस काफ़िर-अदा के नाज़-ओ-अंदाज़ पर।
