शब्दार्थ
काँपूँ
kāmpūñ
hiverb
अर्थ
मैं काँपता हूँ, थरथराता हूँ।
विस्तार
यह 'काँपना' क्रिया का उत्तम पुरुष एकवचन रूप है, जो पुरानी काव्य-भाषा में 'काँपूँ हूँ' (मैं काँपता हूँ) की रचना में प्रयुक्त हुआ है। इस शेर में आशिक़ अपनी सर्द आह के कलेजे के आर-पार हो जाने के डर से काँप रहा है। यह अंतर्मन के भय और अत्यधिक दुःख से उत्पन्न सिहरन को दर्शाता है।
व्युत्पत्ति
Sanskrit 'कम्प' (kampa) evolving through Prakrit 'कम्पइ' (kampaï) to Hindi/Urdu 'काँपना' (kā̃pnā).
प्रयोग
In classical Urdu ghazal (notably in Mir Taqi Mir's era), appending 'हूँ' to this form created a habitual or present continuous tense ('काँपूँ हूँ' = 'I shiver').
उदाहरण
सोच कर हिज्र की तारीकियाँ काँपूँ हूँ
सर्द आहों के तसव्वुर से भी काँपूँ
समानार्थी
थरथराऊँलरज़ूँ
संबंधित शब्द
काँपनाकंपनलरज़िशसर्द
