शब्दार्थ

काँटा

kāñṭā

hinoun

अर्थ

काँटा, शूल; असह्य चुभन, आंतरिक टीस या कष्ट।

विस्तार

शाब्दिक रूप से इसका अर्थ शूल है, किंतु शायरी में यह हृदय की टीस, रुकावट या आंतरिक पीड़ा का प्रतीक है। प्रस्तुत शेर में 'काँटा सा निकल जाना' मुहावरे के रूप में प्रयुक्त हुआ है, जिसका अर्थ असहनीय व्यथा से मुक्ति मिल जाना है। शायर कहता है कि यदि प्राण निकल जाते, तो विरह की यह निरंतर चुभन भी समाप्त हो जाती।

व्युत्पत्ति

Derived from Sanskrit 'कण्टक' (kaṇṭaka), transitioning through Prakrit into modern Hindi-Urdu.

प्रयोग

Conventionally paired in contrast with 'gul' (rose/beloved), it symbolizes the inevitable distress and hazards encountered on the path of love.

उदाहरण

चुभता है जिगर में दर्द का काँटा

दिल से वो काँटा हसरतों का न निकला

समानार्थी

ख़ारशूलअणी

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