शब्दार्थ

ओस

os

hinoun, feminine

अर्थ

रात में पौधों पर जमने वाली नमी; शबनम।

विस्तार

शास्त्रीय काव्य में 'ओस' (शबनम) का प्रयोग प्रायः आंसुओं, विरह और जीवन की क्षणभंगुरता को दर्शाने के लिए होता है। इस शेर में बाग़ में पड़ी ओस को देखकर शायर को अहसास होता है कि मुस्कुराता हुआ फूल दरअसल आंसुओं से भरी आंख है।

व्युत्पत्ति

Sanskrit 'अवश्याय' (avaśyāya - dew, frost) > Prakrit > Old Hindi/Urdu 'os'.

प्रयोग

In the ghazal tradition, dew is often contrasted with a blossoming flower to depict sorrow camouflaged as laughter.

उदाहरण

पंखुड़ी पर ओस की बूँद

सवेरे ओस का पड़ना

समानार्थी

शबनमतुषारनीहार

संबंधित शब्द

शबनमक़तराचश्म-ए-पुर-आबअश्क
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