शब्दार्थ
ऋषी
ṛṣī
hinoun
अर्थ
तपस्वी, मुनि, साधु अथवा ज्ञानी महात्मा।
विस्तार
काव्य में 'ऋषि' का अर्थ ध्यान और तपस्या में लीन किसी महान मुनि अथवा संत से है। इक़बाल के प्रस्तुत शेर में यह शब्द प्रतीकात्मक रूप से महात्मा गांधी और उनके राजनीतिक अनशन (फ़ाक़ों) की ओर संकेत करता है। शायर का मानना है कि शक्ति और संकल्प के बिना केवल तपस्या से व्यवस्था में बदलाव नहीं आता।
व्युत्पत्ति
Sanskrit (ऋषि, ṛṣi - seer, visionary, ascetic).
प्रयोग
In modern Urdu poetry, particularly in Iqbal, it is used to symbolize Indian spiritual asceticism and moral endurance.
उदाहरण
ऋषि की कुटिया में प्रेम और शांति
प्राचीन ऋषि का कठिन तप
समानार्थी
मुनितपस्वीसाधुदरवेश
संबंधित शब्द
मुनितपस्वीतपोवनसाधु
