शब्दार्थ

इक़रार

iqraar

hinoun, masculine

अर्थ

स्वीकृति, क़बूल करना या हामी भरना।

विस्तार

शास्त्रीय उर्दू शायरी में 'इक़रार' का अर्थ किसी सत्य, प्रेम या वचन को मान लेना अथवा स्वीकार करना है। इस शेर में यह 'इंकार' के विलोम के रूप में आया है, जो यह दर्शाता है कि सृष्टि के हर ज़र्रे में सत्य की ऐसी गवाही है कि उसका इंकार भी अंततः एक इक़रार बन जाता है। यह हृदय और वाणी से किसी हक़ीक़त की तस्दीक़ को व्यक्त करता है।

व्युत्पत्ति

Arabic إقرار (iqrār), verbal noun of the Form IV verb أَقَرَّ (aqarra, 'to confirm, affirm'), derived from the root ق-ر-ر (q-r-r, 'to settle, be firm').

प्रयोग

Frequently paired antithetically with 'inkaar' (denial) in ghazals to dramatize the dialectic of admission and refusal in both romantic and metaphysical contexts.

उदाहरण

इक़रार-ए-मोहब्बत की इक रस्म निभाई।

उस के इंकार में भी इक इक़रार छुपा था।

समानार्थी

एतराफ़क़बूलतस्लीम

संबंधित शब्द

मुक़िरक़रारइंकार
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