शब्दार्थ
आरिफ़
‘Ārif
अर्थ
ईश्वर-तत्व का ज्ञाता, आध्यात्मिक ज्ञानी या सूफ़ी।
विस्तार
इस्लामी सूफ़ी परंपरा और उर्दू शायरी में आरिफ़ उस साधक को कहते हैं जिसे प्रत्यक्ष आंतरिक अनुभव और मारिफ़त (ईश्वरीय बोध) प्राप्त हो। इस शे'र में आरिफ़ का अर्थ उस आत्मज्ञानी से है जो ईश्वरीय गुणों के माध्यम से परम तत्व (ज़ात) के आध्यात्मिक नशे में सदैव डूबा रहता है। यह शब्द केवल किताबी ज्ञान रखने वाले आलिम या रूढ़िवादी ज़ाहिद से भिन्न उच्च आध्यात्मिक चेतना वाले व्यक्ति को दर्शाता है।
व्युत्पत्ति
Arabic (عارف), active participle of the root 'a-r-f' (ع-ر-ف), meaning to know, recognize, or perceive intuitively.
प्रयोग
In ghazal poetry, the 'arif' is often contrasted with the dry, ritualistic 'zahid' (ascetic) as an embodiment of genuine divine love and spiritual insight.
उदाहरण
आरिफ़ की नज़र ज़ाहिर के बजाय बातिन पर होती है।
हर आरिफ़-ए-हक़ राज़-ए-हक़ीक़त से बाख़बर है।
