शब्दार्थ

आजिज़-सुख़न

ājiz-sukhan

hiadjective

अर्थ

काव्य या बातचीत में असमर्थ अथवा कमज़ोर।

विस्तार

'आजिज़' (लाचार या कमज़ोर) और 'सुख़न' (वाणी या शायरी) से मिलकर बना यह सामासिक पद उस व्यक्ति के लिए आता है जो काव्य-रचना में निपुण न हो। शेर में यह 'क़ादिर-सुख़न' (काव्य-प्रवीण) के विलोम के रूप में प्रयुक्त हुआ है। यहाँ शायर अपनी अभिव्यक्ति की असमर्थता या विवशता की ओर संकेत करता है।

व्युत्पत्ति

Arabic 'ājiz' (عاجز, powerless, deficient) + Persian 'sukhan' (سخن, speech, discourse).

प्रयोग

In classical Urdu poetry, it is primarily employed as an expression of poetic modesty (inkisārī) or in rhetorical contrast with master poets.

उदाहरण

आजिज़-सुख़न की फ़रियाद कौन सुनेगा।

हम ठहरे आजिज़-सुख़न, वो हैं क़ादिर-ए-कलाम।

समानार्थी

कम-सुख़नबे-ज़बानना-तवाँ-गो

संबंधित शब्द

क़ादिर-सुख़नसुख़न-वरसुख़न-फ़हम
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