शब्दार्थ
आइना-साज़
ā'īna-sāz
hinoun
अर्थ
आईना बनाने वाला, दर्पण निर्माता।
विस्तार
शाब्दिक अर्थ में दर्पण या आईना बनाने वाला कारीगर। शास्त्रीय शायरी में इसका प्रयोग रूपक के तौर पर उस कल्पना या मस्तिष्क के लिए होता है जो भ्रम और प्रतिबिंबों की रचना करता है। इस शे’र में 'ख़याल' (विचार/कल्पना) को आइना-साज़ कहा गया है जो दृश्यों को प्रतिबिंबित करने का साधन रचता है।
व्युत्पत्ति
Persian compound of 'ā'īna' (mirror) and '-sāz' (present stem of 'sākhtan', meaning to make or construct).
प्रयोग
Commonly used in Sabk-e-Hindi and Ghalib's poetry to explore metaphysical themes of reflection, illusion, and subjective perception.
उदाहरण
ख़याल का आइना-साज़ नया तिलिस्म गढ़ता है।
हुस्न के जलवों से आइना-साज़ भी हैरान रह गया।
समानार्थी
आईनागरशीशागरदर्पणकार
संबंधित शब्द
आइनाअक्ससाज़ख़याल
