शब्दार्थ
अरक़-फ़िशानी
'araq-fishānī
hinoun
अर्थ
पसीना या बूँदें टपकाना अथवा बिखेरना।
विस्तार
यह शब्द पसीने या जल-कणों के टपकने और बिखरने के अर्थ में प्रयुक्त होता है। शास्त्रीय शायरी में महबूब के चेहरे या ज़ुल्फ़ों से टपकते पसीने की तुलना मोतियों या टूटते तारों से की जाती है। इस शेर में ज़ुल्फ़ से पसीने की बूँदों का गिरना उल्कापात जैसा प्रतीत होता है, जिससे शायर भयभीत है।
व्युत्पत्ति
Arabic 'araq' (sweat, moisture) + Persian 'fishānī' (from fishāndan, to scatter or shed).
प्रयोग
A common aesthetic motif in ghazal poetry used to describe delicate perspiration on the beloved's forehead or hair, evoking drops that shine like pearls.
उदाहरण
रुख़-ए-यार पर अरक़-फ़िशानी का समाँ
अरक़-फ़िशानी-ए-जबीं से मोती बिखर गए
समानार्थी
क़तरा-रेज़ीशबनम-फ़िशानीपसीना-रेज़ी
संबंधित शब्द
अरक़फ़िशाँअरक़-आलूदशबनम
