शब्दार्थ

अरक़-फ़िशाँ

araq-fishāñ

hiadjective

अर्थ

पसीना टपकाने वाला; पसीने से तर-ब-तर।

विस्तार

यह एक सामासिक विशेषण है जिसका अर्थ है पसीना टपकाने वाला अथवा पसीने से भीगा हुआ। शास्त्रीय शायरी में यह विशेष रूप से माशूक़ के चेहरे की नज़ाकत दर्शाने के लिए प्रयुक्त होता है, जहाँ पसीने की बूँदें फूल पर शबनम की तरह चमकती हैं। प्रस्तुत शेर में यह पसीने से तर उस मुखड़े को दर्शाता है जिसकी नमी को गुलाब के अर्क़ के समान माना गया है।

व्युत्पत्ति

Arabic 'araq' (عرق - sweat, distillation) combined with the Persian present participle suffix 'fishān' (فشاں - scattering/shedding, from fishāndan).

प्रयोग

Frequently paired with 'rū' (face) or 'jabīñ' (forehead) in ghazals to evoke the modesty, heat of emotion, or radiant freshness of the beloved.

उदाहरण

जब भी वो रू-ए-अरक़-फ़िशाँ सामने आया।

माथा अरक़-फ़िशाँ था और रुख़सार पर हया की लाली थी।

समानार्थी

अरक़-आलूदपसीना-आलूदतर-ब-तर

संबंधित शब्द

अरक़गुलशबनमरू
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