शब्दार्थ
अनल-बहर
anal-bahr
hiphrase
अर्थ
'मैं समंदर हूँ'—सृष्टि और ईश्वर के अद्वैत का उद्घोष।
विस्तार
यह अरबी वाक्यांश 'अनल-हक़' (मैं सत्य हूँ) की तर्ज़ पर गढ़ा गया है, जिसका अर्थ है 'मैं सागर हूँ'। ग़ालिब के इस शे'र में यह वहदत-उल-वजूद (अद्वैत) के दर्शन को दर्शाता है, जहाँ पानी का हर क़तरा अपने भीतर असीम सागर का अहसास रखता है। यह जीवात्मा के परमात्मा में विलीन होने और अहं के मिट जाने का प्रतीक है।
व्युत्पत्ति
Arabic: 'anā' (I) + 'al-baḥr' (the sea/ocean).
प्रयोग
In classical Urdu ghazal, it is employed as a mystical trope to symbolize the mystical realization that the microcosm contains the macrocosm.
उदाहरण
साज़-ए-अनल-बहर
क़तरे का दावा-ए-अनल-बहर
समानार्थी
अहम ब्रह्मास्मिअनल-हक़
संबंधित शब्द
अनल-हक़क़तराबहरवहदत-उल-वजूद
