चश्म-ए-ग़ज़ब से नीम-निगह मेरे वास्ते — शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
“From those wrathful eyes, one half-glance cast my way— it is, as it were, a bud dipped and steeped in poison.”
अर्थ
क्रोध भरी आँखों से मेरी ओर डाली गई एक आधी नज़र मानो ज़हर में बुझाई हुई एक कली है।
विस्तार
इस शेर में शायर अपने महबूब की ग़ुस्से भरी नज़र को देखता है और उसे अजीब तरह से ख़ूबसूरत पाता है। जब वह क्रोध से भरी आँखों से उसे आधी नज़र से देखती है, तो वह आधी निगाह उसे एक फूल की कली जैसी लगती है। मगर यह कली ज़हर में डूबी हुई है, जैसे उसमें बुझा दी गई हो। यानी ख़ूबसूरती सच्ची है, पर वह घाव भी देती है। वह नाराज़ नज़र फूल की तरह खींचती है, लेकिन उसमें नाराज़गी का दर्द भी छिपा है। आशिक़ के दिल में उसका ग़ुस्सा भी दिलकश बन जाता है, भले ही उसमें मिठास के साथ तकलीफ़ भी हो।
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