हमको तो बहुत रंज दिये इश्क़ में दिल ने क्या क्या न तुराब इस दिल-ए-रंजूर से देखा

“In love, my own heart has brought me endless grief; O Turab, what trials haven't I suffered from this sorrow-stricken heart!”

— शाह तुराब अली क़लंदर
अर्थ

इश्क़ में दिल ने हमें बहुत दुख दिए हैं; ऐ तुराब, इस दुखी और रंजिदा दिल की वजह से हमने क्या-क्या मुसीबतें नहीं देखीं!

विस्तार

इस ख़ूबसूरत शेर में शायर अपनी तकलीफ़ों का इल्ज़ाम महबूब या ज़माने पर नहीं, बल्कि अपने ही दिल पर लगाता है। 'दिल-ए-रंजूर' यानी ग़मगीन और बीमार दिल का रूपक बाँधकर वह बताता है कि कैसे ख़ुद उसके दिल की मोहब्बत ने उसे ज़िंदगी भर दर्द के सिवा कुछ न दिया। यहाँ एक गहरा अफ़सोस और थकी हुई बेबसी है, मानो शायर अपने सीने में धड़कते उस साथी से हार मान चुका हो जिसने उसे हर तरह की आज़माइश में झोंक दिया।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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