लिखा तावीज़ किसने आह इस लड़की को दासी का पढ़ा ही किसने अफ़सून हाय मेरी हवासी का

“Who inscribed an amulet, alas, to make this maiden my slave? Who ever chanted an enchantment for the longing that I crave?”

— शाह तुराब अली क़लंदर
अर्थ

अफ़सोस, इस लड़की को दासी बनाने के लिए किसने तावीज़ लिखा, और मेरी तीव्र इच्छा की पूर्ति के लिए किसने जादू का मंत्र पढ़ा?

विस्तार

इस शेर में शायर अपनी बेकाबू चाहत और इश्क़ की लाचारी को जादू-टोने के रूपक से बड़ी नज़ाकत से बयां कर रहा है। वह अफ़सोस जताते हुए पूछता है कि भला ऐसा कौन सा तावीज़ लिखा गया जो उस अल्हड़ महबूबा को मेरी दासी या मुरीद बना दे? साथ ही वह अपनी तड़प और बेचैन ख्वाहिश पर तंज़ करता है कि इस दीवानगी और हवस को वश में करने वाला कोई मंत्र आज तक बना ही नहीं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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