“If saying 'Arise by my command!' they bring the slain lover back to life, then 'Arise by God's leave' was merely the miracle of the Messiah.”
यदि महबूब 'मेरे हुक्म से जी उठ' कहकर आशिक को दोबारा ज़िंदा कर देता है, तो 'अल्लाह के हुक्म से जी उठ' कहना तो बस मसीहा (हज़रत ईसा) का चमत्कार था।
इस शेर में शायर ने हज़रत ईसा के उस मशहूर मोजज़े (चमत्कार) का ज़िक्र किया है, जहाँ वे 'अल्लाह के हुक्म से जी उठ' कहकर मुर्दों में जान फूँक देते थे। मगर इश्क़ की नज़ाकत देखिए, शायर महबूब को इससे भी आला मक़ाम पर रखते हुए कहता है कि वह तो बस 'मेरे हुक्म से जी उठ' कहकर ही अपने आशिक़ को नई ज़िंदगी बख़्श देता है। यह महबूब की बेपनाह कु़दरत और इश्क़ में उसके ख़ुदा जैसे मर्तबे की एक बेहद दिलकश और शोख़ मिसाल है।
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