रग-ओ-पै में आग भड़क उठी, फुंके है पड़ा सभी तन बदन
मुझे साक़िया मय-ए-आतिशीं का ये जाम कैसा पिला दिया ?
— शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
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