ऐ दिल जनाब-ए-क़ुद्स में तू कब सा हुआ? दुनिया के फेर में अभी तू है फँसा हुआ

“O heart, when did you ever reach the court of sacred grace? You are still entangled deep within the worldly maze.”

— शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
अर्थ

ऐ दिल, तू पवित्र ईश्वर के दरबार में कब पहुँच पाया है? तू तो अभी भी इस दुनिया के झंझटों और चक्करों में ही फँसा हुआ है।

विस्तार

इस शेर में शायर बड़े प्यार और तंज़ से अपने ही दिल को आईना दिखाता है। वह पूछता है कि तूने भला कब रूहानी बुलंदी पा ली जो खुद को पाक समझने लगा है, जबकि सच तो यह है कि तू अब भी दुनियादारी की उलझनों और मोह-माया के भंवर में बुरी तरह फंसा है। यह शेर इंसान की उस कशमकश को छूता है जहाँ दिल खुदा की क़ुरबत तो चाहता है, मगर सांसारिक लालच से आज़ाद नहीं हो पाता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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