Where the mind is led forward by thee into ever-widening thought and action— Into that heaven of freedom, my Father, let my country awake.

“Where the mind is led forward by thee into ever-widening thought and action— Into that heaven of freedom, my Father, let my country awake.”

— रवींद्रनाथ टैगोर
अर्थ

कवि ईश्वर से, उन्हें पिता कहकर संबोधित करते हुए, प्रार्थना करता है कि वह उनके देश को स्वतंत्रता के ऐसे स्वर्ग में जगाएँ। यह स्वतंत्रता ऐसी हो जहाँ मन हमेशा विस्तृत होते विचारों और कार्यों की ओर अग्रसर रहे।

विस्तार

यह सुंदर दोहा रवींद्रनाथ टैगोर की अपने देश के लिए एक हार्दिक प्रार्थना है। इसमें वे एक ऐसे राष्ट्र की कल्पना करते हैं जहाँ मन लगातार विस्तृत हो, किसी उच्च शक्ति या महान सिद्धांतों द्वारा निर्देशित हो, जिससे व्यापक विचार और सार्थक कार्य हों। यह ऐसी स्वतंत्रता का आह्वान है जो केवल राजनीतिक स्वतंत्रता से कहीं अधिक है; यह बौद्धिक और आध्यात्मिक मुक्ति के बारे में है। टैगोर चाहते हैं कि उनका देश "स्वतंत्रता के स्वर्ग" में जागृत हो, एक ऐसी स्थिति जहाँ लोग निडर, ज्ञानी और हमेशा प्रगति के लिए प्रयासरत हों, संकीर्णता और भय से मुक्त हों। यह एक प्रबुद्ध और वास्तव में स्वतंत्र समाज का दर्शन है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.