Where words come out from the depth of truth;
Where tireless striving stretches its arms towards perfection;
“Where words come out from the depth of truth; Where tireless striving stretches its arms towards perfection;”
— रवींद्रनाथ टैगोर
अर्थ
यह दोहा एक ऐसी स्थिति का वर्णन करता है जहाँ शब्द सत्य की गहराई से निकलते हैं और जहाँ अथक प्रयास पूर्णता की ओर बढ़ते हैं।
विस्तार
यह दोहा एक आदर्श स्थिति का खूबसूरत वर्णन करता है। कल्पना कीजिए एक ऐसी जगह की जहाँ हर शब्द दिल की सबसे गहरी सच्चाई और ईमानदारी से निकलता है, जिसमें कोई दिखावा नहीं। यह एक ऐसी जगह भी है जहाँ हर कोई लगातार प्रयास करता रहता है, बिना थके और बड़े समर्पण के साथ काम करता है, सिर्फ कुछ पाने के लिए नहीं, बल्कि पूर्णता और अपने सर्वोत्तम तक पहुँचने के लिए। यह ईमानदारी, अटल प्रयास और निरंतर आत्म-सुधार का एक दर्शन है।
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