ग़ज़ल
তুমি কি কেবলই ছবি
کیا تم محض اک تصویر ہو؟
यह ग़ज़ल 'तुम्ही की केबोली छोबी' एक प्रियतम के लिए वक्ता की गहरी लालसा को व्यक्त करती है जो एक चित्रित छवि या दूरस्थ नीहारिका की तरह मायावी और दूर प्रतीत होता है। यद्यपि प्रियतम वक्ता के सपनों और जागृत विचारों का केंद्र है और उनकी सभी आकांक्षाओं का अंतिम लक्ष्य है, वे अदृश्य रहते हैं। यह कविता प्रियतम से स्वयं को प्रकट करने, निकट आने और भ्रम की दीवार को तोड़ने का एक हार्दिक निवेदन है।
गीत सुनें
1
তুমি কি কেবলই ছবি, শুধু পটে লেখা?
ওই-যে সুদূর নীহারিকা, যারা করে আলোর ইশারা—
क्या तुम केवल एक चित्र हो, बस पट पर लिखा हुआ? वह दूरस्थ नीहारिका है, जो प्रकाश का इशारा करती है।
2
তুমি কি তাদের মতো দূরে থাকো একা?
আমার স্বপন তুমি, জাগরণেও তুমি,
क्या तुम भी उनकी तरह दूर अकेले रहते हो? तुम मेरे स्वप्न हो, और तुम मेरी जागृति में भी हो।
3
আমার সকল সাধনার তুমি চরম পাওয়া।
তবু কেন, হে প্রিয়, থাকো অধরা—
मेरी सभी साधनाओं की तुम ही चरम उपलब्धि हो। फिर भी, हे प्रिय, तुम क्यों अप्राप्य रहते हो?
4
ধরা দাও, কাছে এসো, ভাঙো এই মায়া॥
अपने आप को समर्पित करो, करीब आओ और इस माया को तोड़ो।
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