ग़ज़ल

একলা চলো রে

ایکلا چلو رے

"एकला चलो रे" आत्मनिर्भरता और साहस को प्रेरित करने वाला एक सशक्त गीत है। यह व्यक्तियों को प्रोत्साहित करता है कि यदि कोई उनका साथ न दे, बात न करे या सभी डर के मारे मुँह मोड़ लें, तो भी वे अपने मार्ग पर अकेले ही आगे बढ़ें। यह गीत अकेलेपन में भी अपनी आवाज़ खोजने और अपनी यात्रा जारी रखने का संदेश देता है।

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लिपि व अर्थ
1
যদি তোর ডাক শুনে কেউ না আসে তবে একলা চলো রে। একলা চলো, একলা চলো, একলা চলো, একলা চলো রে॥
यदि तुम्हारी पुकार पर कोई न आए, तो अकेले चलो। अकेले चलते रहो।
2
যদি কেউ কথা না কয়, ওরে ওরে ও অভাগা, যদি সবাই থাকে মুখ ফিরায়ে সবাই করে ভয়—
यदि कोई बात न करे, अरे, अरे, अरे अभागे, यदि सब मुँह फेर लें और सब डरें।
3
তবে পরান খুলে ও তুই মুখ ফুটে তোর মনের কথা একলা বলো রে॥
तो, तुम अपना दिल खोलकर अपने मन की बात अकेले ही बोलो।
4
যদি সবাই ফিরে যায়, ওরে ওরে ও অভাগা, যদি গহন পথে যাবার কালে কেউ না দেয় সাথ—
हे अभागे, यदि सब लौट जाएं और गहन मार्ग पर जाते समय कोई साथ न दे।
5
তবে পথের কাঁটা ও তুই রক্তমাখা চরণতলে একলা দলো রে॥
तो, तुम अकेले ही रास्ते के काँटों को अपने रक्त-रंजित चरणों तले कुचल दो।
6
যদি আলো না ধরে, ওরে ওরে ও অভাগা, যদি ঝড়-বাদলে আঁধার রাতে দুয়ার দেয় ঘরে—
हे अभागे, यदि प्रकाश न हो, और यदि तूफ़ान-बारिश वाली अँधेरी रात में घर का दरवाज़ा टूट जाए—
7
তবে বজ্রানলে আপন বুকের পাঁজর জ্বালিয়ে নিয়ে একলা জ্বলো রে॥
तो, वज्र की अग्नि में अपने सीने की पसलियों को जलाकर अकेले जलो।
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