ग़ज़ल

বাজে করুণ সুরে

سوزناک سُر میں بجے

एक उदास बाँसुरी की धुन अनजानी पीड़ा और भूली हुई यादों को जगाती है। वक्ता को लगता है कि वे इस धुन को जानते भी हैं और नहीं भी, और आश्चर्य होता है कि यह उनके दिल में दर्द क्यों जगाती है और उन्हें किसी खोए हुए अतीत की याद दिलाती है।

गीत सुनें
लिपि व अर्थ
1
বাজে করুণ সুরে আনমনা বাঁশরি, কাহার লাগি কাঁদে ওই— জানি না তো॥
अनमनी बाँसुरी करुण स्वर में बज रही है। वह किसके लिए रोती है, यह मुझे नहीं पता।
2
মনে হয় চিনি তারে, মনে হয় না চিনি, মনে পড়ে কোনো কথা, মনে পড়ে না॥
मुझे लगता है कि मैं उन्हें जानता हूँ, और मुझे यह भी लगता है कि मैं उन्हें नहीं जानता। कुछ बातें याद आती हैं, पर कुछ याद नहीं आतीं।
3
তবু কেন এ সুর এলে বুকে লাগে ব্যথা, কোন হারানো দিনের কথা জাগে গো॥
फिर भी यह धुन मेरे हृदय में पीड़ा क्यों जगाती है, और कौन से खोए हुए दिनों की यादें ताजा करती है?
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বাজে করুণ সুরে | Sukhan AI