ग़ज़ल
আনন্দলোকে মঙ্গলালোকে
در عالمِ شادمانی، در نورِ سعادت
यह ग़ज़ल दिव्य सत्य और सुंदरता का गुणगान करती है, उसकी सर्वव्यापी महिमा का वर्णन करती है जो ब्रह्मांड को प्रकाशित करती है और सभी अंधकार को दूर करती है। साधक, ज्ञान और प्रेम के माध्यम से, इस परम सत्य को खोजने का प्रयास करता है और अपने जीवन को इसके उज्ज्वल प्रकाश से भरने की कामना करता है।
गीत सुनें
1
আনন্দলোকে মঙ্গলালোকে বিরাজ সত্য সুন্দর,
মহিমা তব উদ্ভাসিত তারায় তারায়, গ্রহে গ্রহান্তর॥
हे सत्य और सुंदर, आप आनंद और कल्याण के लोकों में विराजमान हैं। आपकी महिमा हर तारे में और ग्रह-ग्रह पर प्रकाशित होती है।
2
আলোকময় কোটি রবি তোমার চরণে কর নতি,
অন্ধকার সব নিমেষেক নাশে তোমার দীপ্তি রতি॥
करोड़ों तेजस्वी सूर्य आपके चरणों में नमन करते हैं। आपकी दिव्य दीप्ति से पल भर में सारा अंधकार नष्ट हो जाता है।
3
জ্ঞানে প্রেমে মুক্তিপথে তোমার সন্ধান করি,
সত্যের আলোয় ভরা হোক মোর জীবন তরী॥
मैं ज्ञान और प्रेम के माध्यम से मुक्ति के मार्ग पर तुम्हारी खोज करता हूँ। मेरे जीवन की नैया सत्य के प्रकाश से परिपूर्ण हो।
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